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राघव चड्ढा को हटाने के बाद AAP में घमासान, भाजपा-कांग्रेस भी कूदी

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आम आदमी पार्टी में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया है। राघव के वीडियो संदेश पर आप नेताओं ने पलटवार किया है, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली आलम की खबर।नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहा मतभेद अब खुली राजनीतिक टकराहट में बदलता दिखाई दे रहा है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पार्टी की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गई है। इस पूरे विवाद को और हवा तब मिली जब राघव ने एक वीडियो संदेश जारी कर खुद को जनता की आवाज बताते हुए पार्टी के भीतर फैसलों और राजनीतिक दिशा पर सवाल खड़े कर दिए। उनके इस रुख ने पार्टी के भीतर पहले से मौजूद असहजता को और उजागर कर दिया है। अब स्थिति यह है कि न सिर्फ आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता खुलकर जवाब दे रहे हैं, बल्कि विरोधी दलों ने भी इस पूरे विवाद को राजनीतिक हथियार बना लिया है।

राघव चड्ढा के बयान के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने उनके तेवरों को सामान्य असहमति के बजाय पार्टी लाइन से विचलन के रूप में पेश करने की कोशिश की है। कई नेताओं ने यह संकेत दिया है कि लंबे समय से राघव का रुख संगठन की सामूहिक रणनीति से मेल नहीं खा रहा था। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठाया गया कि जब विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत थी, तब राघव अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे थे। इसी वजह से अब यह विवाद केवल किसी पद से हटाए जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर निष्ठा, भूमिका और राजनीतिक प्रतिबद्धता पर बहस का कारण बन गया है।

भाजपा ने केजरीवाल और आप नेतृत्व पर बोला हमला

इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी सांसद को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़े, तो यह इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर संवाद और लोकतांत्रिक स्पेस लगभग खत्म हो चुका है। सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बनकर रह गई है, जहां स्वतंत्र राय रखने वाले नेताओं को या तो किनारे कर दिया जाता है या दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राघव चड्ढा का हालिया वीडियो इस बात का सबूत है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और नेतृत्व केवल बाहर से एकजुटता दिखाने में लगा है।

भाजपा ने इस मुद्दे को केवल एक व्यक्ति या एक पद के विवाद के रूप में नहीं, बल्कि आप की आंतरिक राजनीतिक संस्कृति से जोड़कर उठाया है। सचदेवा ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब पार्टी के भीतर से असहमति की आवाज बाहर आई हो। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि इससे पहले भी कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को लेकर नाराजगी जाहिर की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उनके मुताबिक, जिन सिद्धांतों—जैसे पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र—को लेकर आम आदमी पार्टी राजनीति में आई थी, वही अब उसके भीतर कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

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कपिल मिश्रा और उदित राज ने भी उठाए सवाल

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने भी इस विवाद को आम आदमी पार्टी की अंदरूनी लड़ाई और सत्ता संघर्ष का संकेत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असहमति और असंतोष पल रहा है, जो अब खुलकर सामने आने लगा है। वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा से साफ रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर राघव पार्टी के भीतर हो रही चीजों से असहमत हैं, तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए और अस्पष्ट संकेतों के बजाय स्पष्ट राजनीतिक स्थिति लेनी चाहिए। विपक्षी दलों की इन प्रतिक्रियाओं ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है।

आप का पलटवार— मोदी सरकार पर क्यों नहीं बोल रहे राघव?

राघव चड्ढा के वीडियो और उसके बाद उठे विवाद पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार करते हुए इसे एक सामान्य संगठनात्मक फैसला बताया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल में समय-समय पर जिम्मेदारियों और पदों में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यदि कोई नेता पार्टी के सामूहिक फैसलों—जैसे विरोध, वॉकआउट या रणनीतिक राजनीतिक रुख—के साथ नहीं चलता, तो कार्रवाई होना अस्वाभाविक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियों का बदलना कोई नई बात नहीं है और इसे व्यक्तिगत अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

वहीं संजय सिंह ने भी राघव पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने हमेशा संघर्ष, निडरता और सत्ता से सवाल पूछने की राजनीति की है। उनके मुताबिक, पार्टी की पहचान ही यह रही है कि वह बड़े मुद्दों पर बिना डरे अपनी बात रखती है, लेकिन राघव चड्ढा हाल के समय में इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते दिखे। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर राघव की चुप्पी सवाल खड़े करती है। इसी कड़ी में प्रदेश नेतृत्व की ओर से भी यह संदेश दिया गया कि पार्टी की राजनीति डरकर पीछे हटने की नहीं, बल्कि सीधे मुकाबले की रही है, और जो इस राजनीतिक रेखा से हटता है, उसके प्रति सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब यह केवल पद का विवाद नहीं, AAP की दिशा पर सवाल

पूरे घटनाक्रम को देखें तो यह साफ है कि मामला अब सिर्फ राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने का नहीं रह गया है। यह विवाद अब आम आदमी पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली, संगठनात्मक लोकतंत्र, राजनीतिक प्राथमिकताओं और आंतरिक संवाद जैसे बड़े सवालों को सामने ला रहा है। जिस तरह से राघव चड्ढा का वीडियो सामने आया, उसके बाद पार्टी नेताओं ने पलटवार किया और फिर विपक्षी दलों ने इसे हाथोंहाथ लिया, उससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराई पकड़ सकता है। फिलहाल आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह इस पूरे विवाद को किस तरह संभालती है और जनता के बीच अपनी एकजुट छवि को कितना बचा पाती है।

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